जिले के बारे में

भागलपुर जिला, जिसे ऐतिहासिक रूप से चम्पा नगरी के नाम से जाना जाता है, भारत के सबसे पुराने और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्रों में से एक है। गंगा बेसिन के उपजाऊ मैदानों में बसा यह जिला पूर्वी बिहार के प्रशासनिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक केंद्र के रूप में कार्य करता है।
भागलपुर जिले के मुख्य आकर्षण
  • भारत की सिल्क सिटी (रेशम नगरी): अपने विश्व प्रसिद्ध टसर सिल्क और भागलपुरी चादरों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। भागलपुर के रेशम उद्योग को भौगोलिक संकेत (GI Tag) भी प्राप्त है।
  • प्राचीन अंग साम्राज्य: यह पौराणिक काल में महाभारत के राजा कर्ण द्वारा शासित प्राचीन अंग महाजनपद की राजधानी था। यह जैन धर्म का भी एक प्रमुख केंद्र है, जहाँ 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का जन्म हुआ था।
  • विक्रमशिला विश्वविद्यालय: 8वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में पाल वंश के राजा धर्मपाल द्वारा स्थापित विक्रमशिला विश्वविद्यालय के अवशेष इसी जिले (कहलगांव के पास) में हैं। यह नालंदा के बाद बौद्ध शिक्षा का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र था।
  • मंजूषा कला: यह जिला मंजूषा कला का जन्मस्थान है। यह एक अनोखी, सांपों पर आधारित लोक कला शैली है जो क्षेत्रीय लोककथाओं और बिहुला-विषहरी उत्सव से गहराई से जुड़ी हुई है।
  • उच्च शिक्षा का बड़ा केंद्र: पटना के बाद भागलपुर बिहार के उन चुनिंदा जिलों में से है जहाँ IIIT भागलपुर, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU), और सबौर में बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) जैसे बड़े संस्थान स्थित हैं।
  • जैव विविधता (Dolphin Sanctuary): गंगा नदी में स्थित विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य इसी जिले में है, जो भारत के राष्ट्रीय जलीय जीव (गंगा डॉल्फिन) के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है।
भौगोलिक और प्रशासनिक रूपरेखा
  • कुल क्षेत्रफल: 2,569 वर्ग किलोमीटर
  • प्रशासनिक विभाजन: जिला गंगा नदी द्वारा विभाजित है और इसे सुचारू रूप से चलाने के लिए 3 अनुमंडल (Sub-divisions) और 16 प्रखंड (Blocks) बनाए गए हैं:
    • भागलपुर सदर अनुमंडल: जगदीशपुर, नाथनगर, सबौर, गोराडीह, शाहकुण्ड, सुल्तानगंज।
    • कहलगांव अनुमंडल: कहलगांव, पीरपैंती, सन्हौला।
    • नवगछिया अनुमंडल: नवगछिया, बिहपुर, गोपालपुर, इस्माइलपुर, खरीक, नारायणपुर, रंगराचौक।